seo kaise kare in hindi

SEO Kaise Kare in Hindi » आर्टिकल रैंक करे मात्र 24 घंटे में

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जब भी हम किसी वेबसाइट पर कोई भी कंटेंट डालते है, तो हम ये चाहते है की वो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। किसी भी कंटेंट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बहुत सी चीज़ें करनी पड़ती हैं। इस लेख में आप एस.ई.ओ के बारे में जानेंगे। जो की अपने कंटेंट की पहुंच को बढ़ाने के लिए एक बहुत ही अच्छा तरीका है। हमने इस लेख में seo kaise kare पूरा विस्तार से बताया हुआ है। इस लेख को पढ़ने के बाद आप भी अपने कंटेंट का एस.ई.ओ करना सीख जायेंगे।

एस.ई.ओ फ्रेंडली कंटेंट क्या है? (SEO Friendly Content)

एस.ई.ओ फ्रेंडली कंटेंट लिखने का मतलब है की आपका कंटेंट कुछ इस तरीके से लिखा हो की सर्च इंजनस को आपका कंटेंट ढूढ़ने और उसे रैंक करने में मदद मिलें।

इसके लिए आपको अपने कंटेंट की विषय की जानकारी को इतने विस्तार और आसान तरीके से लिखना होगा की सर्च इंजनस और पाठक दोनों आपके कंटेंट को आसानी से समझ और पढ़ सके।

आपके कंटेंट का मुख्य विषय आपके पूरे कंटेंट से अच्छे तरीके से जुड़ा होना चाहिए। ताकि अगर कोई आपके लिखे हुए विषय को सर्च करता है तो सर्च इंजनस आपके द्वारा लिखे गए लेख को उन्हें दिखाए।

इसके लिए सर्च इंजनस को ये पता होना चाहिए की आपने भी उस सर्च किये गए टॉपिक के बारे में लिखा हुआ है। इसके साथ-साथ आपको ये भी ध्यान रखना होगा की आप लेख लिखते वक़्त अपने मुख्य विषय से बिलकुल भी ना भटके।

अपने कंटेंट को एस.ई.ओ फ्रेंडली कैसे बनाएं? (SEO kaise kare)

आप अपने कंटेंट को एस.ई.ओ फ्रेंडली बनाने के लिए निचे बताये गए पॉइंट्स का जरूर पालन करे।

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1. कंटेंट की संरचना कैसी हो? (Content Structure)

कंटेंट की संरचना को समझने के लिए एक अच्छा लेख कैसे लिखे का उदहारण ले सकते है –

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किसी भी विषय पर लेख लिखने के लिए सबसे पहले आपके पास उस विषय से जुडी पर्याप्त सुचना होनी चाहिए। सुचना इकठ्ठा करने के लिए आप प्रामाणिक सूत्रों को ज्यादा प्राथमिकता दे।

सुचना इकठ्ठा करने के बाद आप लेख लिखना शुरू कर सकते है। सबसे पहले आपको अपने लेख का परिचय लिखना होगा। परिचय में आपको ये बताना होगा की आपने अपने लेख में किस विषय पर लिखा है। और उसको पढ़ने के बाद पाठक को क्या जानकारी मिलने वाली है।

परिचय लिखने के बाद आपको अपने लेख की मुख्य जानकारी को इस तरीके से लिखना होगा की पहले लिखी हुई बात दूसरी बात से जुडी हो। ताकि पाठक के पढ़ने का प्रवाह ना बिगड़े और वे लेख को पूरा पढ़ने पर मजबूर हो जाए।

मुख्य जानकारी के बाद आप पुरे लेख का एक निष्कर्ष लिख सकते है। निष्कर्ष में आप पाठक को ये बता सकते है की आपके लेख को पढ़ने के बाद उन्हें क्या जानकारी मिली। इसके बाद आप अंत में अपने पाठको के लिए कुछ सन्देश या टिप्पणी कर सकते है।

2. हैडलाइनस, हैडिंगस, सब-हैडिंगस इत्यादि का प्रयोग (Use Headlines)

हेडिंग्स और सब-हेडिंग्स बनाने के बहुत से फायदे हैं। इन्हे बनाने से पाठक को कंटेंट पढ़ने में बहुत आसानी हो जाती है। और कंटेंट की रीडेबिलिटी भी बढ़ जाती है। ये बाते सर्च इंजिन्स पर भी लागू होती है।

जब सर्च इंजिन्स के क्रॉलरस किसी भी वेबसाइट पर जाते है तब वो उस वेबसाइट के पुरे कंटेंट (टेक्स्ट) को ले लेते है। और उसे किसी डाटाबैंक में स्टोर कर लेते है। वे उस वेबसाइट के एक्सटर्नल और इंटरनल लिंक्स को भी स्टोर कर लेते है।

इसलिए किसी भी लेख (कंटेंट) के हैडलाइनस को हमे अच्छे से सोच के बनाना चाहिए। क्योंकि ये हैडलाइनस हमारे आर्टिकल की रैंकिंग को बढ़ाने में बहुत मदद करते हैं।

3. फोकस कीवर्ड का इस्तेमाल (Select a Focus keyword)

ध्यान रहे की आपको अपने लेख में फोकस कीवर्ड का इस्तेमाल जरूर करना है। जिस कीवर्ड या टर्म के ऊपर आप अपने कंटेंट को सर्च इंजन में रैंक होते हुए देखन चाहते है। उसे हम फोकस कीवर्ड कहते है।

ज्यादातर कंटेंट का हिंसा फोकस कीवर्ड के ऊपर ही लिखा जाता है। ध्यान रहे की फोकस कीवर्ड का प्रयोग आर्टिकल में ना तो ज्यादा बार इस्तेमाल हो और ना ही कम बार। फोकस कीवर्ड कितनी बार इस्तेमाल करना चाहिए, लेख की लम्बाई और विषय के ऊपर निर्भर करता है।

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ज्यादा लम्बे और आम विषयों के लेख में फोकस कीवर्ड ज्यादा बार इस्तेमाल होता है। फोकस कीवर्ड के इस्तेमाल से सर्च इंजिन्स को आपके कंटेंट को श्रेणियों में बाटने में आसानी हो जाती है। आप कोशिश करे की फोकस कीवर्ड को आप अपने लेख के शुरुआत और अंत में जरूर लिखे।

4. अपने पिछले लेखों के लिंक्स को नए लेखों में शामिल करना

अपने लेखों को इंटरलिंक करना बहुत जरुरी होता है। लेखों को इंटरलिंक करने से पाठकों को आपके अच्छे लेखों के बारे में पता चलता है। और आपके पिछले कंटेंट पर भी इंटरलिंकिंग की वजह से ट्रैफिक बढ़ने लगता है।

सर्च इंजिन्स के क्रॉलरस लिंक्स को भी रीड और कलेक्ट करते है। इसलिए अगर आपका कोई ऐसा लेख है, जिस पर ज्यादा ट्रैफिक आता हो तो आप उसे अपने किस कम ट्रैफिक वाले लेख से इंटरलिंक कर सकते है। ऐसा करने से उस लेख का ट्रैफिक बढ़ने की उम्मीद बढ़ जाती है।

5. फोकस कीवर्ड या विषय से सम्बंधित कीवर्ड रिसर्च करना (Keyword Research)

किसी भी विषय या कीवर्ड पर लेख लिखने से पहले हमे उस विषय से सम्बंधित कीवर्ड्स को अच्छे से रिसर्च कर लेना चाहिए। ऐसा करने से हमे ये पता चल जाता है की हमारे चुने गए विषय के बारे में लोग कितना सर्च कर रहे है।

विषय से सम्बंधित रिसर्च किये गए कीवर्ड्स से हमे ये पता चल जाता है की लेख में क्या-क्या लिखना है और कितना लिखना हैं। रिसर्च किये गए कीवर्ड्स के अनुसार लेख लिखने से लेख की रैंकिंग भी बढ़ती है। क्योंकि वे कीवर्ड्स लोगों द्वारा ज्यादा सर्च किया जाता है।

अगर आपके लेख की क्वालिटी दूसरे के लेख की क्वालिटी से अच्छी होगी तो इन रिसर्च किये गए कीवर्ड्स पर आपका लेख सर्च इंजनस में रैंक कर सकता है। कीवर्ड रिसर्च करने के लिए बहुत से ऑनलाइन टूल्स उपलब्ध है, जैसे की ahrefs

6. इमेजिस या फोटोज का सही से इस्तेमाल करें (Use Images)

अपने लेख में फोटो या इमेज का इस्तेमाल जरूर करें। क्योंकि फोटोज या इमेजिस के इस्तेमाल से लेख की गुणवत्ता बढ़ जाती है। इस से आपका कंटेंट और भी मनोहर हो जाता है और पाठक को पढ़ने में भी मजा आता है।

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फोटोज या इमेजिस का चुनाव करते वक़्त ये ध्यान रहे की आपके चुने गए फोटोज आपके लेख के विषय से जुडी हो या वो आपके लेख का चित्रण कर रही हो।

फोटोज या इमेजिस का साइज भी लेख के एस.ई.ओ को प्रभावित करती हैं। हमे ज्यादा बड़ा साइज का फोटो या इमेज इस्तेमाल नहीं करना। बड़े साइज की वजह से वेबसाइट के पेज की लोडिंग टाइम बढ़ जाती है। जिसकी वजह से साइट की एस.ई.ओ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

आपको कम साइज की इमेज या फोटो का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके साथ में ये भी ध्यान रखना होगा की इमेज की क्वालिटी और विजिबिलिटी भी ना बिगड़े। आप चाहे तो ऑनलाइन, कैन्वा का इस्तेमाल करके अपनी फोटोज को एडिट कर सकते है।  

इमेजिस का चुनाव करने और उनका साइज बनाने के बाद, आपको उनका नाम भी रखना होगा। इमेजिस का नाम रिसर्च किये गए कीवर्ड्स पर रखा जा सकता है। इसके अलावा आप अपनी चतुराई के अनुसार भी नाम रख सकते है। 

एक बात का ध्यान रहे की आप ALT टैग्स को डालना ना भूले। क्योंकि सर्च इंजिन्स ALT टैग्स को भी रीड कर लेते है। और सही से भरे गए ALT टैग्स आपके इमेजिस की रैंकिंग को बढ़ा सकते है। 

7. कंटेंट टाइटल और मेटा डिस्क्रिप्शन (Meta Content)

कंटेंट का टाइटल लिखते वक़्त ये ध्यान रहे की उसमे फोकस कीवर्ड का इस्तेमाल जरूर हो। टाइटल आपको ऐसा लिखने की कोशिश करनी चाहिए की, पाठक उसे पढ़ने के बाद ये समझ जाए की अंदर उसको क्या जानकारी मिलेगी।

इसके साथ-साथ आपकों टाइटल को थोड़ा आकर्षक भी बनाना पड़ेगा। ताकि लोगों के अंदर उस टाइटल के लिंक पर क्लिक करने की उत्सुकता बढे।

मेटा डिस्क्रिप्शन में आपको अपने लेख का बहुत ही कम शब्दों में सारांश लिखना होता है। इस से पाठकों को ये पता चलता है की आपके लेख में उन्हें किस विषय पर जानकारी मिलेगी।

मेटा डिस्क्रिप्शन लिखते वक़्त आपको ये भी ध्यान रखना होगा की आप उसमे लेख का निचोड़ ना लिख दे।

निष्कर्ष (Conclusion)

किसी कंटेंट का एस.ई.ओ उसको ऊपर उठा सकता और निचे भी गिरा सकता है। एस.ई.ओ करते वक़्त हमे बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जैसे की कंटेंट की संरचना कैसी की गयी है, हेडलाइंस कैसे बनाई हुई है, कंटेंट में फोटोज और इमेजिस का इस्तेमाल कैसे किया गया है, इत्यादि। 

आपको लेख लिखते वक़्त ध्यान रखना होगा की उसकी रीडेबिलिटी अच्छी हो और कंटेंट हाई क्वालिटी हो। इसके साथ-साथ आपको अपने लेख की लम्बाई को भी चुने गए विषय के अनुसार नियंत्रित करना होगा।

इस लेख में हमने seo kaise kare टॉपिक को बहुत ही विस्तार से आपके लिए लिखा है। ताकि आप इस जानकारी का इस्तेमाल करके अपने कंटेंट का एस.ई.ओ अच्छे से कर सके।

अगर आपका इस लेख से सम्बंधित कोई भी प्रश्न है तो आप हमे मैसेज कर सकते हैं। हम आपके प्रश्नों के उत्तर जल्दी से जल्दी देने की कोशिश करेंगे।


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